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दिल्ली नगर निगम चुनाव में आम आदमी पार्टी की 272 में से 218 पर बढ़त

April 20, 2017 11:14 PM

दिल्ली:

दिल्ली नगर निगम चुनाव में आम आदमी पार्टी को 272 में से 218 सीटों पर बढ़त मिल रही है । पार्टी द्वारा एक प्रोफेशनल एजेंसी की सहायता से कराए गए सर्वे में यह बात सामने आई है कि दिल्ली के लोगों में अभी भी आम आदमी पार्टी बेहद लोकप्रिय है और आम आदमी पार्टी शासित दिल्ली सरकार ने पिछले दो साल में राजधानी में बेहतरीन काम करके दिखाया है।  एक पत्रकार वार्ता में इस सर्वे के नतीजों को सार्वजनिक किया गया । इस मौके पर पार्टी के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय प्रवक्ता आशीष खेतान ने कहा कि ‘निगम चुनाव पर यह सर्वे एक बेहद ही प्रोफेशनल एजेंसी से कराया गया है और उसके सर्वे के आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली के लोगों में आम आदमी पार्टी आज भी लोकप्रिय है।

60 फीसदी लोग निगम में व्याप्त भ्रष्टाचार को सबसे बड़ा मुद्दा मानते हैं । लोगों को आम आदमी पार्टी की बिजली पानी की योजना बेहद पंसद है। करीब 80 फीसदी लोग बिजली और 72 फीसदी लगी पानी के बिलों की बजह से खुश हैं लोग कहते हैं कि इस योजना से तीन हजार से दस हजार तक की बचत हो रही है। 62 फीसदी लोगों का लगता है कि एमसीडी में भाजपा की जीत के बाद केंद्र सरकार बिजली पानी निगम को सौंप सकता है। ज्यादातर लोग जानतंे हैं कि मुंबई जैसे शहरों सहित देश के विभिन्न शहरों में बिजली की दरें दिल्ली के मुकाबले बहुत मंहगी हैं । मोहल्ला कलीनिक, शिाक्षा आदि को भी लोग लाभकारी बता रहे हैं। सर्वे के मुताबिक इस चुनाव में कांग्रेस, भाजपा और आप तीनों का वोट शेयर गिर रहा है लेकिन कांग्रेस के हिस्से में आठ सीटें आ रही हैं ।

सर्वे से निकल कर आया है कि दिल्ली नगर निगम चुनाव में बिजली, पानी, गंदगी और भ्रष्टाचार अहम मुद्दा हैं और पिछले 10 सालों में नगर निगम में भाजपा के कुशासन के खिलाफ लोगों में बेहद नाराजगी है। सर्वे बताता है कि दिल्ली नगर निगम में आम आदमी पार्टी को कुल 272 सीटों में से 218 सीटें मिलने जा रही हैं। सर्वे की रिपोर्ट के मुताबिक करीब-करीब 61 फीसदी लोगों ने दिल्ली में गंदगी के लिए एमसीडी को जिम्मेदार ठहराया लोगों का मानना है कि एमसीडी के पार्षद और उच्च अधिकारी विकास के कार्य के पैसे का गबन करते हैं जिसकी वजह से दिल्ली में कूड़ा कचरा साफ नहीं होता है।


दिल्ली के 60 प्रतिशत लोगों के अनुसार निगम में व्याप्त भ्रष्टाचार इस चुनाव का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण मुद्दा है। ये लोग मानते हैं कि मौजूदा निगम में किसी भी छोटे से काम को करवाने के लिए भी रिश्वत देनी पड़ती है। एजेंसी द्वारा किए गए इस सर्वे की रिपोर्ट के अनुसार जेजे कलस्टर और अनाधिकृत कॉलोनियों के लोगों में केजरीवाल सरकार की बिजली पानी की योजना सबसे अधिक लोकप्रिय है। सर्वे की फाइंडिंग दिखाती हैं कि लोगों को हर महीने 3000 से 10000 तक की बचत बिजली पानी के बिलों में हो रही है। करीब 80 फीसदी से भी ज्यादा लोग बिजली के कम हुए दामों से खुश हैं वहीं करीब 72 फीसदी लोग पानी के बिल माफ होने की वजह से केजरीवाल सरकार से संतुष्ट हैं।


लोगों को यह डर भी सता रहा है कि कहीं एमसीडी चुनाव के परिणाम केजरीवाल के खिलाफ हुए तो केंद्र सरकार बिजली-पानी के विभाग राज्य की केजरीवाल सरकार से छीन कर नगर निगम को न दे दे। करीब 62 फीसदी लोग यह मानते हैं कि केंद्र बिजली-पानी के विभागों को निगम के हवाले कर सकता है। अधिकांश लोगों का मानना है कि अगर ऐसा हुआ तो दिल्ली में भी अन्य महानगरों की तरह बिजली महंगी हो जाएगी। 65 फीसदी लोगों को यह जानकारी है कि दिल्ली के मुकाबले मुंबई में बिजली के दाम तीन गुना ज्यादा हैं। 83 फीसदी लोगों को यह जानकारी है कि दिल्ली में बिजली के दाम देश में सबसे सस्ते हैं। 73 फीसदी लोगों की राय है कि देश में जहां-जहां बीजेपी और कांग्रेस की सरकारें हैं वहां बिजली के दाम दिल्ली के मुकाबले दो से तीन गुना ज्यादा हैं।


. शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्रों में हुए केजरीवाल सरकार के काम से भी दिल्ली की जनता काफी खुश है। 59 फीसदी लोग मानते हैं कि केजरीवाल सरकार ने सरकारी अस्पतालों और डिस्पेंसरियों को पहले के मुकाबले काफी बेहतर बना दिया है, वहीं 18फीसदी लोग ऐसे भी मिले जिन्होंने या तो अपना या अपने किसी करीबी का इलाज मोहल्ला क्लीनिक में कराया है। इनमें से 87फीसदी लोग मोहल्ला क्लीनिक की सुविधाओं और इलाज के स्तर से काफी खुश हैं। 55फीसदी लोगों ने बताया कि दिल्ली सरकार की मुफ्त दवा, फ्री टेस्ट और इलाज की स्कीम से उनकी हर महीने काफी बचत होने लगी है। इस तरह दवाई और डॉक्टर के खर्चों में हुई प्रतिमाह बचत की राशि को लोगों ने 1000 से लेकर 7500 रुपए बताया।


सर्वे के मुताबिक 78फीसदी लोग यह मानते हैं कि केजरीवाल सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में बेहतरीन काम किया है। जिन लोगों के बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं उनमें से 68फीसदी लोगों का मानना है कि उनके बच्चों को दिल्ली सरकार के स्कूलों में अच्छी शिक्षा प्राप्त हो रही है। प्रोफेशनल एजेंसी के अनुसार मध्यम और उच्च वर्ग का एक एक बड़ा धड़ा जिसने 2015 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को वोट दिया था वह निगम में ‘आप’ को पसंद कर रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह अरविंद केजरीवाल की हाउस टैक्स माफी की चुनावी घोषणा है।

हाउस टैक्स के जंजाल से सबसे ज्यादा दिल्ली का मध्यम वर्ग प्रभावित है। सर्वे में यह पाया गया है लोग हाउस टैक्स बिल से ज्यादा निगम द्वारा की जा रही गड़बडि़यों से परेशान हैं। अब इसी वर्ग को केजरीवाल का हाउस टैक्स मुक्त दिल्ली का वादा बेहद पसंद आ रहा है।  7 से 17 अप्रैल तक चले इस सर्वे के अनुसार पार्टी को 272 में से 218 वार्डों में भारी जीत हासिल हो रही है। भाजपा 39 सीटों के साथ नंबर दो पर है और कांग्रेस 8 सीटों के साथ नंबर 3 पर। निर्दलीय और अन्य को 7 सीटें हासिल होंगी। कुल 31,507 लोगों की राय जानने के बाद, सर्वे एजेंसी ने ‘आप’ को 51.2 फीसदी वोट बीजेपी को 28.1 और कांग्रेस को 9.2 फीसदी वोट शेयर दिया है। अन्य और निर्दलीय को 11.5 फीसदी वोट मिल रहे हैं।

जहां आप को 2015 के विधानसभा चुनाव के मुकाबले 3.1 फीसदी कम वोट पड़ रहे हैं। वहीं बीजेपी का वोट शेयर भी 4.2 फीसदी कम हो रहा है। सर्वे से सबसे ज्यादा चिंता का विषय कांग्रेस के लिए है। कांग्रेस का वोट शेयर 2015 के मुकाबले 0.5 फीसदी और कम हुआ है। कांग्रेस अपने आप को बस इस बात का दिलासा दे सकती है कि विधानसभा चुनाव में जहां उसका खाता भी नहीं खुला था इस बार उसे 8 वार्डों में जीत प्राप्त हो रही है।

 

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